अनपढ़ व्यक्ति की प्रेरणादायक कहानी

          तो दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम एक ऐसी कहानी के बारे में बात करने वाले हे जिनको पढ़कर आपके जीवन में थोड़ा बदलाव जरूर आयेंगा। तो चलो दोस्तों इस कहानी को हम शरू करते हे। प्रेरणादायक धार्मिक कहानी

प्रेरणादायक कहानी

अनपढ़ व्यक्ति की प्रेरणादायक कहानी

          दोस्तों ये कहानी हे रामपुर नामक गांव की जिनमें एक सबसे बड़ा मंदिर था। और वो मंदिर इतना बड़ा और प्रख्यात था की उनमे काम करने वाले हर कोइ व्यक्ति पगार लेकर उस मंदिर में काम करता था। यानिकि पूजा करने वाला , आरती करने वाला , मंदिर की साफ सफ़ाई करने वाला , मंदिर का घंटा बजाने वाला यानिकि हर कोइ व्यक्ति पगार के आधार पर उस मंदिर में काम करता था। मगर जो व्यक्ति घंटा बजाने वाला था वो आरती के वक्त घंटा बजाने में इतना मशहूर हो जाता की हर किसी को उसके अंदर भगवान का भक्ति भाव दिखाइ देता था। और वो इतना प्रिय घंटा बजाता था की हर कोइ उसका आदर करता था। कूच सालो ऐसा ही चलता रहा।

       पांच साल के बाद वो मंदिर में ट्रस्टी बदल जाने की वज़ह से नया ट्रस्टी आया और वो बोला की अब इस मंदिर में जो व्यक्ति पढ़ा लिखा होगा वही इस मंदिर में काम करेंगे यानिकि जो व्यक्ति अनपढ़ हे उस व्यक्ति को इस मंदिर से निकाला जाएगा। अब क्या होना था वो घंटे बजाने वाले को भी ये कहा गया की आज से तुम जा सकते हो और ये लो तुम्हारी पगार क्योकि तुम पढ़े लिखे नहीं हो। इसलिए हम तुम्हे इस काम से निकाल रहे हे। तब वो अनपढ़ घंटा बजाने वाला व्यक्ति बोला की साहब में वैसे तो पढ़ा लिखा नहीं हु मगर में मेरा घंटा बजाने वाला काम तो में पुरे दिल से और मन से करता हु और इस काम में पढ़ा लिखा होना जरुरी तो नहीं हे। मगर वो नया ट्रस्टी उस व्यक्ति की एक बात भी नहीं सुनता हे और कहता हे की नहीं कूच नहीं हो सकता क्योकि इस मंदिर का अब ये नियम हे की इस मंदिर में पढ़ा लिखा हुआ व्यक्ति ही काम कर सकता हे। इसलिए तुम यहाँ काम नहीं कर सकते। अब वो घंटा बजाने वाला व्यक्ति ये सुनकर वहा से चला जाता हे। शिक्षादायक कहानी 

             अब वो मंदिर में सारे पढ़े लिखे हुए व्यक्तिओ को रखा गया। मगर मंदिर में आने वाले सभी लोगो को अब आरती में उतना मज़ा नहीं आता था जो पहले वो अनपढ व्यक्ति के घंटे बजाने में आता था। इसलिए कूच दिनों के बाद कूच लोग उस अनपढ घंटे बजाने वाले व्यक्ति के घर जाते हे और उसको कहते हे की तुम वापस मंदिर में घंटा बजाने के लिए आ जाओ और फिर से घंटा बजाने लगो। तो वो अनपढ़ व्यक्ति बोलता हे की में ऐसे अब उस मंदिर में घंटा बजाने के लिए नहीं आ सकता। क्योकि अगर में वापस उस मंदिर में घंटा बजाने के लिए आऊंगा तो नये ट्रस्टी को ऐसा लगेगा की में नौकरी के लिए वापस आया हु इसलिए में अब उस मंदिर में नहीं आ सकता। तब एक समझदार व्यक्ति बोलता की कोइ बात नहीं हे तुम ऐसा करो की मंदिर के आगे अपनी एक छोटी अगरबत्ती की दुकान खोल के तुम अगरबत्ती को बेचा करना और तुम आरती के वक्त घंटा बजाने के लिए आ जाना ताकि किसी को ये भी नहीं लगेगा की तुम नौकरी के लिए आये हो। तब उस अनपढ़ व्यक्ति ने कहा की ठीक हे और फिर उसने मंदिर के सामने एक अगरबत्ती की दुकान खोल दी। अब वो अनपढ़ व्यक्ति रोज सुबह दुकान पर आता और आरती के वक्त मंदिर में जाकर घंटा बजाता रहता था। कई सालो तक ऐसा ही चलता रहा।

          दस सालो के बाद उस अनपढ़ व्यक्ति की वो अगरबत्ती की छोटी सी दुकान एक छोटी दुकान नहीं रही बल्कि उसने अपनी हर काम को पुरे दिल से करने की आदत से और अपनी लगातार लगन और महेनत से उस व्यक्ति ने अपनी एक दुकान से कई सारि दुकाने खड़ी कर दी थी और यहां तक की उसने अपनी खुद की अगरबत्ती की फ़ैक्टरी भी वहां पर दाल दी थी। अब वो व्यक्ति सबसे अमीर व्यक्ति बन गया था और वो अपनी BMW कार केलर अपनी फ़ैक्टरी में आया करता था। मगर आरती के वक्त वो मंदिर में जाकर घंटा जरूर बजाता था।

          और कूच ही सालो बाद उस मंदिर का ट्रस्टी फिर से बदल गया। और नये ट्रस्टी को मंदिर की मरामत करानी थी तो उसके लिए पैसो की आवश्यक्ता थी। तो उस नये ट्रस्टी ने सबहे पहले उस घंटे बजाने वाले फ़ैक्टरी के मालिक के पास पंहुचा। और बोला की मंदिर की मरामत करानी हे मगर उसके लिए पांच लाख की जरुरत हे। ये सुनकर उस फेक्टरी के मालिक ने एक भी सवाल नहीं किया और अपनी जेब से चेक निकालकर नए ट्रस्टी के सामने कर दिया और बोला की इस चेक को तुम भर दो। तो उस नए ट्रस्टी ने उस चेक को भर दिया और बोला की अब आप साइन कर दीजिये। तब वो फ़ैक्टरी का मालिक बोलता हे की मुझे साइन करना नहीं आता। मगर  में अंगूठा लगा सकता हु। ये सुनकर नया ट्रस्टी हैरान हो जाता हे और उस फेक्टरी के मालिक से कहता हे की आप अनपढ़ हे और पढ़े लिखे नहीं हे फिर भी आप इतने अमीर व्यक्ति हे कही आप पढ़े लिखे होते तो आप न जाने कहा होते और कितने अमीर होते। तब वो फेक्टरी का मालिक कहता हे की अगर में पढ़ा लिखा होता तो में आज तक सिर्फ मंदिर में घंटा बजाने का काम ही करता रहता होता। 

      तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये सीखना चाहिए की कई बार हमारे में जीवन में भी ऐसी परिस्थितिया बनती हे की आपको आपकी कमी का एहसास कराया जाता हे। यानिकि तुमको ये बताया जाता हे की भाई तुममें ये कमी हे इसलिए तुम ये काम नहीं कर सकते हो। या इस काम के लिए तुम लायक नहीं हो। मगर वही कमिया आपके लिए नए रास्ते बनाती हे। यानिकि हमारे जीवन में अगर एक रास्ता बंध होता हे तो दूसरा अपने आप ही खुल जाता हे। इसलिए अगर आपको आपकी कभी को बताया जाये तो ये ध्यान से देखिये की आपके जीवन बड़े मौके की दस्तक़ होने वाली हे। युवा के लिए प्रेरणादायक कहानी

  तो दोस्तों अगर आपको ये कहानी पसंद हे तो आप इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी जरूर सेर करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *