रबर के बारे में जानकारी और प्रकार

तो दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम बात करने वाले हे रबर के बारे में जिनका पहला प्रयोग पेन्सिल के निशान को मिटाने के लिए किया गया था। रबर दुनिया की व्यावसायिक फसलों में से एक हे जिनका इस्तमाल वर्त्तमान समय में इतना ज्यादा होता हे की रबर के बिना काम चलाना असंभव समझा जाता हे तो चलो दोस्तों रबर के बारे में और भी अधिक जानकारी को हम जान लेते हे।

रबर के बारे में सामान्य जानकारी

रबर के प्रमुख उत्पादन देशो में थाईलैंड , इंडोनेशिया , मलेशिया , भारत , चीन हे जबकि भारत रबर के उत्पादन में चौथा स्थान हे लेकिन भारत के घरेलु खपत ज्यादा होने की वजह से ये रबर की आयात करता हे। रबर का आदिमस्थान अमेरिका हे। 

रबर के गुणों को जानने के लिए कई सालो से प्रयोग करने वाले वैज्ञानिको में अमेरिका के चाल्स गुडईयर का नाम प्रमुख हे।

रबर के पेड़ से जो सफ़ेद प्रवाही निकलता हे जिसे लेटेक्स कहा जाता हे जिससे रबर तैयार किया जाता हे सबसे पहले रबर अमेजन बेसिन में जंगली रूप में उगता था। वर्त्तमान में रबर दुनिया की व्यावसायिक फसलों में से एक हे आप जानते हे की आज रबर का इस्तमाल सभी प्रकार के वाहनों के ट्यूब टायर , सभी प्रकार के जूते , प्रूफ कपडे , बिजली के तार कवर जैसी चीजे बनाने में रबर का उपयोग किया जाता हे।

भारत में रबर का उत्पादन विशेषकर केरल , कर्णाटक और तमिलनाडु राज्यों में होता हे जबकि केरल भारत का सबसे बड़ा रबर उत्पादक राज्य हे।

Rabar ke prakar

रबर कैसे बनता हे ?

रबर के पेड़ से निकलने वाले सफ़ेद तरल प्रदार्थ जिसे लैटेक्स कहा जता हे जिसके सूखने पर प्राकृतिक रबर रबर बनता हे आमतौर पर रबर पेड़ो की करीब 400 से भी अधिक किस्मे पाई जाती हे लेकिन सबसे ज्यादा रबर हैविया ब्राजीलिएन्सिस से मिलता हे।

रबर के पेड़ पर छेद करने से लैटेक्स निकलता हे उसको इखट्टा किया जाता है ये लैटेक्स पानी से हलका होता हे इस लैटेक्स का कैमिकल्स की रसायन से परीक्षण किया जाता हे ताकि बनने वाला रबर बढ़िया किस्म का हो। 

प्राकृतिक रबर पेड़ो से मिलता हे जबकि कृत्रिम रबर कैमिकल्स रिएक्शन के जरिये प्राप्त होता हे।

रबर के प्रकार 

रबर के मुख्य दो प्रकार हे। 

प्राकृतिक रबर 

प्राकृतिक रबर पेड़ो और लताओं के रस यानिकि लेटेक्स से बनता हे जबकि सबसे ज्यादा रबर हैविया ब्राजीलिएन्सिस से प्राप्त होता हे जब भारत में कोचीन , मैसूर , मलाबार , सलेम , त्रावणकोर और श्रीलंका में से प्राप्त होता हे। रबर के पेड़ से करीब पांच साल के बाद लेटेक्स निकलना शरू होता हे और करीब 40 साल तक निकलता रहता हे। एक पेड़ प्रति साल प्राय: 6 पाउंड तक रबर प्राप्त होता हे रबर के पेड़ से रबरक्षीर को इखट्टा करते हे। रबरक्षीर में शुष्क रबर की मात्रा करीब 32 प्रतिशत रहती हे। 

रबर के पेड़ पर छेद करने से लेटेक्स निकलता हे जो रबरक्षीर पानी से हल्का होता हे लेटेक्स में रबर के आलावा रेजिन , शर्करा, प्रोटीन , खनिज और एंजाइम रहते हे। 

शुद्ध रबर में न गंध होती हे और ना ही रंग होता हे पर प्रत्यास्थ और पारदर्शक होता हे और उनका घनत्व 0.915 से 0.930 बिच रहता हे। 

कृत्रिम रबर 

राशायनशालाओ में अनुसन्धान के फलरूप कृत्रिम रबर भी बनने लगा हे। कृत्रिम रबर के कुछ गुण प्राकृतिक रबर से उत्कृष्ट होता हे यानिकि कुछ कामो के लिए कृत्रिम रबर प्राकृतिक रबर से ज्यादा उपयोगी होते हे। 

कृत्रिम रबर को सौ प्रथम जर्मन में इसका निर्माण शरू किया था कृत्रिम रबर को इलेस्ट्रोमर , इलास्टिन , इथेनॉयड नामो से भी जाना जाता हे।

रबर के निर्माण में अनेक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन , आईसोप्रीन , क्लोरोप्रीन , पिपरिलीन , मेथाइल, मेथाक्रिलेट विशेष उल्लेखनीय हे।

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