सोच के बोले ना की बोल के सोचे

     दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम एक ऐसी जीवन प्रेरक कहानी के बारे में बात करने वाले हे की जिसे पढ़कर आपको भी लागेगा की जिन्दगी हर किसी इन्सान के साथ सही और सोच समझकर बात करनी चाहिए क्योकि जब आप कूच भी नहीं बोलते तब तक शब्द आपके ग़ुलाम होते हे मगर बोलने के बाद आप शब्द के ग़ुलाम बन जाते हे इसलिए आप अपने शब्दों का चुनाव समझदारी और होशियारी से करे क्योकि व्यवहार कुशलता के बिना प्रतिभा हमेंशा काम नहीं आती। इसलिए अपने जीवन में सोच समझकर बोलने से कई समस्ये अपने आप ही टल जाती हे। तो चलो दोस्तों इस कहानी को हम शरू करते हे। Inspirational Hindi Story

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         नागपुर नामक एक गांव था जिसमें एक पति पत्नि और उनका एक बेटा तीनों साथ में रहते थे। पति का नाम था अयान और पत्नी का नाम था आरोही जबकि उनके बेटा का नाम था विहान। विहान उनके माता – पिता का बहुत प्यारा और लाड़ला बेटा था। यानिकि जो भी चीज़ की विहान को जरूरत होती थी वो उनके पिता पूरी करते थे। यहाँ तक की उनके पिता विहान को घूमने के लिए भी हप्ते में एक बार ले जाते थे। 

          एकदिन की बात हे अयान और आरोही के बिच में किसी कारण लड़ाई हो जाती हे ऐसे में अयान आरोही से गुस्से की वजह से बहुत कूच बोल डालता हे जो उसको नहीं बोलना चाहिए और उस तरफ आरोही अपने पति से बोले गए अपशब्द की वज़ह से वो अपने बेटे को लेकर अपने मायके चली जाती हे और अयान यहाँ अलेके रह जाता हे। अब अयान अकेले रहने की वजह से वो  बाजार से खाना ले आता हे। फिर वो खाना खाता हे लेक़िन उस रात अयान को नींद नहीं आती हे और वो यही सोचता रहता हे की मैने अपनी पत्नी को ना बोलने के शब्द बोल दिए हे। उनको बाद में अपनी भूल का अहसास होता हे की मुझे मेरी पत्नी के साथ ऐसा दूर व्यावहार नहीं करना चाहिए। अयान को कूच समझ नहीं आता और वो सुबह होते ही अपने गांव के मंदिर में रहने वाले साधु के पास चला जाता हे और वो उस साधु को अपनी सारि कहानी बताता हे और कहता हे की मुझे मेरी ग़लती का अहसास हुआ हे अब मुझे क्या करना चाहिए। तब उस महान साधु ने उसको एक पंखो से भरा हुआ बेग हाथ में दिया और अयान को कहा की जाओ तुम इसको गांव के बीचोंबीच बिखेर दो। अयान उस बेग को लेकर साधु ने जैसा बोला था वैसे ही उसने पंखो से भरा हुआ बेग गांव के बीचोंबीच बिखेर दिया और फिर वो साधु के पास चला गया। तो साधु के उसको कहाँ की तुम पंखो को फिर से इस बेग में भर के वापस ले आओ। तो अयान फिर से गांव के उस जग़ह गया जहाँ उसने पंखो को बिखेर दिया था वहां जाकर उसने बहुत कोशिश की पंखो को उस बेग में भरने की मगर पंख हवा की वजह से इधर उधर हो गए थे इसलिए वो खाली बेग लेकर उस साधु के पास जाता हे। तब वो साधु अयान को समझाते हे की बेटा यही बात भी तुम्हारे जीवन पर भी लागू होती हे की तुमने अपनी पत्नी से बात तो बहुत आसानी से कह दी मगर तुम अपनी कही हुइ बात को कभी वापस नहीं ले सकते हो। इसलिए तुम्हे जो अपने मन में आये वो बोलने से आदमी को वही सुनना पड़ता हे जो हमें पसंद नहीं होता। इसलिए हमें हमारे जीवन में हमें ये जानना भी जरुरी हे की हमें क्या कहना हे और क्या नहीं कहना हे। शब्दों से हमारा नज़रिया झलकता हे मगर वो ही शब्द कभी हमारी भावनाओं को चोट भी पहुंचा सकते हे और हमारे कीमती रिश्तो को भी तोड़ भी सकते हे। आज के ज़माने में लोगो को उतनी चोट तो कुदरत की तबाही से भी नहीं होती जीतनी कठोर या अपशब्द से पहोचती हे।

    तो दोस्तों मुझे आप सभी लोगो से बस इतना ही कहना हे की आप सोच के बोले ना की बोल के सोचे और यही तो फर्क हे बेवकूफ़ी और समझदारी में। जरुरत से अधिक बोलने का मतलब ये नहीं होता की आप बातचीत करने में कुशल हे। क्योकि एक बेवकूफ़ बिना सोचे समझें बोलता हे जबकि एक समझदार इन्सान सोच समझकर बोलता हे। और बिना सोचे समझे बोलने से हमें बाद में पछताना भी पड़ता हे। 

   तो दोस्तों अगर आपको ये कहानी पसंद हे तो आप इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी सेर करे।

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