शेठ की इमानदारी – Best Motivational Hindi Stories

     तो दोस्तो इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम एक ऐसी कहानी के बारे में बात करने वाले हे की इस कहानी को पढ़कर आप भी दुसरो को छोटी – बड़ी मदद जरूर करेंगे। क्योकि भगवान के वहां देर हे मगर अंधेर नहीं इसलिए आप किसी के मदद कर सके तो जरूर करे। तो चलो दोस्तों इस कहानी को हम शरू करते हे। Best Motivational Hindi Stories

Best Motivation Hindi Stories

शेठ की ईमानदारी – Motivational Hindi Stories 

 तो दोस्तों ये कहानी हे रामपुर नामक एक परिवार की जिनमे राजू और उनके माता – पिता तीनों साथ में रहते थे। राजू के पिता की अपनी खुद की एक दुकान थी। और वो राज सुबह दुकान पर जाते थे जबकि राजू की माता घर का सारा काम काज करती थी। और उनका परिवार चलता था। 

       कूच सालों बाद राजू के पिताजी की किसी कारण उनकी मौत हो जाती हे। अब राजू और उसकी माता अकेले हो जाते हे और कूच समय के बाद उनके पास भी जो भी पैसे थे वो धीरे धीरे ख़त्म होते जा रहे थे। तब राजू की माता को राजू के अभ्यास की बहुत चिंता होती हे। और वो राजू को अपने पास बुलाती हे और उनको कहती हे बीटा अब हमारे पास पैसे ख़त्म होने वाले हे और तुम्हारे अभ्यास और घर के लिए भी पैसे की बहुत जरुरत हे इसलिए में तुम्हे अपने कूच जेवरात देती हु तुम इसको लेकर बाजार में जाओ और किसी अच्छी दुकान पर अच्छे दाम में इस जेवरात को बेच दो। तब राजू ने अपनी माता से पूछा की माता मुझे तो कूच पता भी नहीं हे इसलिए आप ही मुझे बताओ की में इस जेवरात को कौन से दुकान पर बेच दू। तब राजू की माता ने राजू से कहा की तुम इस जेवरात को लेकर शहेर के किनारे पर जाना वहां हमारे करीबी रिस्तेदार की जेवरात की दुकान हे तुम उसके पास जाना और कहना की अंकल मेरे पास अब इस दुनिया में नहीं रहे और हमें पैसो की बहुत जरुरत हे इसलिए आप ये मेरी माता के जेवरात को आप अच्छे दाम में खरीद ले। और जो भी पैसे इस जेवरात के होते हे वो मुझे दे दीजिये। ये सब सुनकर राजू उस दुकान पर पहुँच गया और उसने वो सारि बात बात अंकल को बताई। तब उस अंकल ने जेवरात की पोटली हाथ में ली और वो अपनी दुकान में गए और कूच देर के बाद वापस राजू के पास आये और राजू से कहा कि बेटा ये तुम जो जेवरात बेचने के लिए लाये हो उनको तुम वापस अपने घर ले जाओ। ये सुनकर राजू को लगा की अंकल मना कर रहे हे और राजू ने कहा की क्या हुआ अंकल आप मुझे ये जेवरात वापस क्यू दे रहे हो। तब अंकल जी कहते हे की बेटा तुम अपनी माता से ये कहना की अभी मार्केट में मंदी हे इसलिए जेवरात की सही दाम नहीं मिलेंगे। इसलिए तुम इसको संभाल कर रखो। और जब मार्केट में सही दाम मिलने लगेंगे तब हम इस जेवरात को बेचेंगे ताकि तुमको जेवरात के अच्छे और सही दाम मिल सके। और दूसरी बार ये रही की तुम्हारे अभ्यास की और घर के खर्चे की तो तुम चिंता मत करना क्योकि तुम्हारे अंकल जी अभी जिन्दा हे। तुम बस श्याम के पांच बजे मेरी दुकान पर आ जाना ताकि तुमे भी काम सीखने मिलेंगा और मेरा भी काम थोड़ा कम होगा। ये सब सुनकर राजू बहुत ही खुश हुआ। और वो तुरंत वहां से अपने घर अपनी माता के पास गया। और अपनी माता से कहने की वो तो बहुत अच्छे अंकल हे उन्होंने सारे जेवरात वापस दे दिए और कहा की अभी मार्केट में मंदी चल रही हे इसलिए तुम अभी के लिए इस जेवरात को वापस ले जाओ और जब मार्केट में सही होगा तब हम इस जेवरात को बेचेंगे ताकि तुम्हे जेवरात के अच्छे दाम मिल सके। और माता उन्होंने ये भी कहा हे की मेरी पढाई का खर्चा और घर का खर्चा वो देंगे। बस मुझे उनकी दुकान पर जाकर एक या दो घंटे श्याम में थोड़ा काम करना हे। तब राजू की माता ने प्रभु का शुक्रिया अदा किया।

          अब राजू रोज पढाई के बार उस दुकान पर काम करने के लिया जाता और वापस अपने घर लौट आता। कूच सालो ऐसा ही चलता रहा ओर धीरे धीरे राजू को काम की समझ होने लगी यानिकि उनको अब जेवरात की अच्छी ख़बर होने लगी। तब उस अंकल जी राजू को कहा की बेटा कल जब तुम अपने घर वापस जाओ तब तुम कल वापस दुकान आते समय तुम अपने साथ वो जेवरात लेकर आना क्योकि अब मार्केट सही हो गया हे इसलिए अब उस जेवरात के सही दाम मिलेंगे। तब राजू कहा की ठीक हे अंकल कल में वो जेवरात लेकर आउंगा। राजू घर जाकर अपनी माता से कहता हे की माता अब हमें वो जेवरात बेच देना चाहिए क्योकि अब मार्केट में इस जेवरात के सही दाम हमको मिलेंगे तो राजू के माता ने अपनी घर की अलमारी से जो जेवरात रखे थे वो वापस निकाले और राजू को बेचने के लिए दे दिए। अब राजू उस जेवरात की पोटली को अपने कमरे में लेकर गया और सोचा की अकबर देख लेता हु क्या क्या हे इस पोटली में और वो पोटली को खोलता हे तब हो हैरान हो जाता हे उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा हे क्योकि वो सारे जेवरात नक़ली थे। इसलिए राजू को ये समझ नहीं आ रहा था की जिन अंकल ने इतने सालो से हमारी मदद की हे उनकी दुकान पर में कल किस मुँह से जाऊंगा। तब राजू हिम्मत करके उस अंकल की दुकान पंहुचा। तब राजू के खली हाथ को देखकर अंकल जी बोले बेटा क्या हुआ तुम वो जेवरात की पोटली नहीं लाये। तब राजू अपने दो हाथ जोड़कर अंकल जी को प्रणाम करता हे और कहता हे की अंकल जी में ये जानना चाहता हु की क्या वो कारण था की जब में पहली बार जेवरात लेकर आपकी दुकान पर आया था तब अपने मुझे क्यू नहीं बताया की वो जेवरात नकली हे। आपको तो तब भी पता होगा की वो जेवरात नकली हे तो फिर अपने मुझे उस वक्त बताया क्यू नहीं। तब उस अंकल जी कहा की बेटा में बस तुमको ये कहना चाहता हु की जो मैने तुमको उस दिन बता दिया होता की सारे जेवरात नक़ली हे तो शायद तुम और तुम्हारी माता दोनों से सोचते की जब हमारे ऊपर संकट आया तब अंकल जी हमें नक़ली जेवरात बताकर हमसे भाग रहे हे या हमसे पीछा छुड़ा रहे हे। लेकिन बेटा राजू आज तुम्हे ये मालूम हो गया की सही जेवरात कौन से हे और गलत जेवरात कौन से हे। और तुम्हे खुद मालूम हो गया हे की वो जो जेवरात हे वो नक़ली हे।

             तो दोस्तों इस कहानी से हमें दो बातें सीखनी चाहिए पहली ये की हमारे रिश्तो में भी कई बार ऐसा होता हे की हम सब पूरी बात की समझते नहीं हे , या बात हमको पता होती नहीं हे किसी ने कह दिया तो हम सामने वाले इन्सान पर गुस्सा कर देते हे और कभी कभी तो हम उनसे दुरी भी बना लेते हे। इसलिए आप कौशिक करे की किसी भी वजह से या किसी भी बात से आप के और आपके अपनो के बिच कभी भी दुरी पैदा ही न हो। और दूसरी बात हे ये की अगर आप किसी की भी मदद कर सकते हे तो जरूर कीजिये चाहे वो मदद बड़ी हो या छोटी हो। क्योकि आपको उसका परिणाम भी बहुत अच्छा ही मिलेंगा। क्योकि उपरवाले के वहा देर हे मगर अंधेर नहीं हे। इसलिए आप दसको को मदद बनने की कोशिश करे। और भगवान पर भरोसा रखे। सब कूच सही होगा।

   तो दोस्तों अगर आपको ये कहानी पसंद हे तो आप इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी सेर करे।

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