Essay On Bagger In Hindi – एक भिखारी की आत्मकथा

तो दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम एक भिखारी की आत्मकथा ( Essay On Bagger In Hindi ) पर बात करने वाले हे। मुझे उम्मीद हे की आपको ये निबंध अच्छा लगेगा।

भिखारी का परिचय

कुदरत भी हमारे साथ क्या क्या खेल खेलती हे एक दिन था जब में मेरे जन्म दिन पर सारे भिखारियों को मिठाईया बेचता था और आज में खुद एक भिखारी बन चूका हु। और मुझे भिखारी क्यों बनना पड़ा ये एक बहुत लम्बी कहानी हे।  

भिखारी की आत्मकथा हिंदी में

रामपुर नामक एक छोटे से गाँव में मेरा जन्म हुआ था मेरे पिताजी एक किसान थे जो खेती कार्यो  करते थे और उनमे से जो आवक होती थी उससे हमारा परिवार चलता था मेरी एक बहन सुहानी और भाई अयान था हम तीनो को हमारे माता पिता बहुत ही प्यार करते हे हम तीन भाई बहन गाँव से दूर एक स्कूल में अभ्यास करते हे और वैकेशन के दौरान हम बहार घूमने के लिए भी जाते थे। 

Essay On Bagger In Hindi 

एक दिन की बात हे जब में अपने मामा के यहाँ था उस वक्त बारिश का मौसम था और एक दिन रात के दौरान इतनी बारिश हुई की मेरे गांव की पास में बहने वाली नदी में बाढ़ आ गई जिसे मेरे घर के अंदर नदी का पानी घुस गया क्योकि मेरे गर निचले वाले स्थान पर था। नदी का पानी मेरे घर में घुसने की वजह से मेरा घर जमीन दस्त हो गया जिसमे मेरे माता – पिता और भाई बहन की मौत हो गई और में अपने मामा के घर होने की वजह से बच गया। अब मेरा पालन पोषण मेरे मामा ही करते थे मगर मेरे मामा की आर्थिक परिस्थिति ख़राब होने की वजह से वो मुझे आगे पढ़ा नहीं सके लेकिन मेरे मेरे मामा ने मुझको शहर में एक फैक्टरी में नौकरी लगवा दी। दो तीन साल काम करते में अच्छा कमा लेता था और बाद में मैने शादी कर ली अब में और मेरी पत्नी दोनों एक किराये के मकान में रहते थे यहाँ तक मेरी जिंदगी अच्छी चल रही थी।

लेकिन किसी को मेरे खुशियों पर नजर लग गई और में जो फैक्टरी में काम करता था उसमे एक  अकस्मात हो गया जिसमे में मैने मेरी दोनो आँखों को खो दीया जिसकी वजह से अब में फैक्टरी में काम करने के योग्य नहीं रहा जिसे मुझे फैक्टरी को छोड़ना पड़ा। मेरे पास पैसा कमाने का और कोई उपाय नहीं था जिसे मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब हो गई जिसे देखकर मेरी पत्नी भी मुझे छोड़कर चली गई और में अकेला हो गया में अपने मकान का किराया भी मकान मालिक को अपने घर का सामान बेचकर दिया और बाद में मैने उस मकान को भी छोड़ दिया। 

भिखारी की जीवनशैली

उसके बाद क्या होना था अब मेरे पास भीग मांगने के आलावा और कोई उपाय भी तो नहीं था इसलिए मेने एक एक हाथ में कटोरा लिया और दूसरे हाथ में लकड़ी को लेकर इधर उधर भीग मांगने लगा किसी इंसान को मुझ पर तरस आता तो वो मुझे अपने कटोरे में पैसा दे देते या फिर खाना देता इस तरह मेरी जिंदगी चलने लगी। 

में अपने वर्तमान समय से बहुत दुखी था मगर में मेरे हालातो की वजह किसी और को नहीं बल्कि अपने भाग्य को ही देता हु और मेरी भगवान से बस यही दुआ हे की मेरे इस दुखद दिन का जल्द से जल्द अंत आये। मेरे पास भले ही आंख नहीं हे मगर हाथ पैर तो हे इसलिए मुझे कुछ ऐसा काम मिल जाये जिसे में अपना सुखी जीवन व्यतीत कर सकू।

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तो दोस्तों में उम्मीद करता हु की आपके ये कहानी जरूर पसंद आयी होगी तो आप इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी सेर करे। 

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