एक भिखारी लड़का – Hindi Best Inspirational Story

       तो दोस्तों इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हे एक ऐसी कहानी के बारे में जिनको पढ़कर आपको भी जीवन का “लो और दो ” सिंद्धांत के बारे में जान सकेँगे। क्योकि जो आप लोगो को कूच अच्छा देंगे को आपको भी अच्छा ही मिलेंगा। तो चलो दोस्तों ये कहानी को हम शरू करते हे। Best Inspirational Story In Hindi

Beggars Inspirations Story in hindi

एक भिखारी लड़का – Hindi Inspirational Story

 दोस्तों ये कहानी हे एक लड़के की जो भीख मांगकर अपना जीवन व्यतीत करता था। वो रोज सुबह एक मंदिर के पास जाता था और जो इन्सान मंदिर में आते थे उनसे वो लड़का भीग मांगता था और श्याम होते ही वो अपने घर चला जाता था। ये लड़का रोज़ भीख मांगता और अपना जीवन गुजारता था। 

           एक दिन की बात हे की लड़का मंदिर के पास बैठा हुआ था तब उसकी नजर एक शूट बूट पहने शेठजी पर जाती हे तब वो लड़का मन में सोचता हे की ये व्यक्ति बहुत अमीर हे इसलिए उनके पास से भीख मांगने पर वो मुझे ज़्यादा पैसे देंगे। ऐसा सोचकर वो लड़का उस अमिर व्यक्ति के पास जाकर भीख मांगने लगता हे। तब उस अमीर इन्सान ने लडके को कहा की तुम हमेंशा मांगते ही हो क्या कभी तुम किसी को कूच देते भी हो। तब भिखारी लड़का बोलता हे की साहब में तो एक भिखारी हु में लोंगो से हमेंशा मांगता ही रहता हु तो भला लोगो को क्या दे सकता हु। तब वो अमीर इन्सान ने कहा की तुम किसी को कूच दे नहीं सकते तो तुम्हे मांगने का भी कोइ अधिकार नहीं हे। में एक वेपारी हु और में हमेंशा लेन – देन में ही विश्वास करता हु। इसलिए अगर तुम्हारे पास मुझे देने के लिए कूच हे तभी में तुमको कूच दे सकता हु। ऐसा कहकर वो अमीर इन्सान वहाँ से चला जाता हे। मगर वो भिखारी लड़का मंदिर के पास बैठकर उस अमीर इन्सान की कही बात के बारे में सोचते रहा। और उस अमीर इन्सान की बात लडके के दिल में उतर गइ। और वो लड़का सोचने लगा की मुझे भीख में पैसे इसलिए ज्यादा नहीं मिलते क्योकि में भीख मांगने के बदले में किसी को कूच दे नहीं पाता हु। इसलिए उसने निर्णय लिया की कल से जो व्यक्ति मुझे भीख देगा उनको में कूच ना कूच अवश्य दूंगा। लेकिन लड़का फिर से सोचने लगा की मेरे पास ऐसा तो क्या हे जो में भीख के बदले में वो लोगों को दे सकू। लडके को उसके सवाल का ज़वाब नहीं मिलता हे और वो घर चला जाता हे। और सुबह उठकर वो मंदिर भीख मांगने के लिए जाता हे तभी उसकी नजर फूलों पर पड़ी जो रास्ते के आसपास पौधे पर लगे थे तब उस लडके ने सोचा की क्यों न में भीख के बदले ये फूल लोगो को दे दूंगा। और फिर उसने वहां से कूच फूल तोड़े और फिर वो मंदिर पंहुचा भीख मांगने के लिए। अब जब कोइ व्यक्ति उस लडके को भीख देता तो वो लड़का भीख के बदले उस इन्सान को फूल देता। अब वो भिखारी लड़का रोज़ फूल तोड़ता और भीख देने वाले इन्सान को वो दे देता। अब कूच दिनों के बाद उसने महसूस किया की अब पहले से बहुत अधिक लोग उनको भीख दे रहे हे। अब वो लडके के पास जब तक फूल रहते तब तक उनको भीख मिलते थी मगर फूल खत्म होते ही उनको कोइ भीख नहीं देता था। कूच महीनों ऐसा ही चलता रहा। 

        एक दिन वो वो लड़का भीख मांग रहा होता हे तभी उसकी नजऱ उस अमीर इन्सान पर जाती हे जो कई बार मंदिर आता जाता रहता था। जिनकी वजह से उसे भीख के बदलें में कूच ना कूच देने की प्रेरणा मिली थी। और वो लड़का तुरंत उस अमीर इन्सान के पास जाता हे और बोलता हे की आज मेरे पास आपको देने के लिए फूल हे आप मुझे भीख दीजिये। तब उस अमीर इन्सान ने कूच पैसे भिखारी लडके को दिया और उस लडके ने भीख के बदले उस अमिर इन्सान को फूल दे दिया। तो उस अमीर इन्सान ने उस लडके को कहा की क्या बात हे आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो। इतना कहकर वो अमीर इन्सान वहां से चला जाता हे। लेकिन उस अमीर इन्सान के द्रारा की गइ बात फिर से लडके के दिल में उतर गइ। वो बार बार उस आमिर इन्सान की बात को सोचते रहता हे और वो बहुत ही खुश होता हे अब वो अपना सर ऊपर करके चलने लगता हे और उनके चहेरे पर कूच अगल ही चमक होती हे। अब वो लड़का उत्साहित होकर ऊपर आकाश की तरफ़ देखता हे और बोलता हे की में भिखारी नहीं हु में तो एक व्यापारी हु में भी एक व्यापारी बन सकता हु में भी अन्य लोगो की तरह अमीर बन सकता हु। उस दिन के बाद कभी भी वो भिखारी लड़का मंदिर नहीं देखा। 

         कूच सालो के बाद वह भिखारी लड़का शूट बूट में उस मंदिर जाता हे तब वो उस अमीर इन्सान को भी देखता हे तब वो तुरंत उस अमीर इन्सान के पास पहुँचता हे और बोलता हे की क्या अपने मुझे पहचाना। तब वो अमीर इन्सान बोलता हे की नहीं शायद हम पहली बार मिल रहे हे। तब वो लड़का बोलता हे की नहीं हमारी मुलाकात पहले भी दो बार हो चुकी हे। में वही भिखारी हु जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया था की मुझे अपने जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में अपने मुझे बताया की में वास्तव में कौन हु। तब वो अमिर इंसान पहचान लेता हे और बोलता हे तुम ये शूट बूट में कहा जा रहे हो। तब वो लड़का बोलता हे साहब में वही भिखारी हु जो इस मंदिर में भीख मांगता रहता था। मगर आपकी वजह से आज में एक बहुत बड़ा फूलों का व्यापारी हु। और फूलो के व्यापारी काम में दूसरे शहर जा रहा हु। और दोनों अपने अपने काम के लिए चल बसे। 

        तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही सीखना चाहिए की हमें तभी कूच मिलता हे जब हम दुसरो को कूच देते हे। अगर आपको भी सफ़लता के पास पहुंचना हे तो आप ये नियम हमेंशा याद रखे की आप सामने वाले को क्या दे सकते हो। और अगर आप उसे अच्छा देंगे तो आपको भी कूच अच्छा ही मिलेंगा। 

     तो दोस्तों अगर आपको ये कहानी पसंद हे तो आप इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी सेर करे।

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