दो पत्थर – एक प्रेरणादायक कहानी

   तो दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी के बारे में बात करने वाले हे जिसे पढ़कर आप अपनी जिन्दगी में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए हमेंशा के लिए तैयार ही रहेंगे। तो चलो दोस्तों ये कहानी शरू करते हे।

Inspirations story in hindi

Inspirational Story In Hindi

रामपुर नामक एक गांव था जिसमे एक मूर्तिकार रहता था जो तरह तरह की मूर्ति बनाकर अपना जीवन गुजार करता था। ऐसे में एक दिन गांव में से कुछ लोग आते हे और उस मूर्तिकार को मूर्ति बनाने के बारे में कहा तो उस मूर्तिकार के कहा की में आपकी मूर्ति दस दिनों में तैयार कर दूंगा। तब गांव के लोगो के कहा की ठीक हे हम वो मूर्ति लेने के लिए दस दिन के बाद आयेंगे।

        अब वो मूर्तिकार को मूर्ति बनाने के लिए पत्थर की आवश्यकता थी तो वो पत्थर लेने के लिए जंगल में चला गया। जंगल में जाकर मूर्तिकार इधर उधर देखने लगता हे तभी उसकी नजर एक पत्थर पर पड़ती हे वो पत्थर मूर्ति बनाने के लिए ठीक था तो उस मूर्तिकार ने उस पत्थर को उठाकर अपनी बैलगाड़ी में डाल दिया और वो वापस घर चलने लगा। रास्ते में जाते जाते उनको एक दूसरा पत्थर देखा तो उसने दूसरे पत्थर को भी अपनी बैलगाड़ी में डाल दिया और घर चलने लगा।

       मूर्तिकार अपने घर जाकर उसने मूर्ति बनाने के लिए पहले वाले पत्थर को लिया और उस पर हथोड़े से चोट मारने लगता हे तभी उस पहले पत्थर से आवाज़ निकलती हे की  “रुको रुको मुझे मत मारो ” तभी मूर्तिकार इधर उधर देखता हे और सोचता हे की ये आवाज़ किधर से आ रही हे और वो फिरसे हथोड़ा मारना शरू करता हे तो दूसरी बार भी उस पहले वाले पत्थर से आवाज आती हे की ” रुको रुको मुझे मत मारो ” मुझे हथोड़े के मार से डर लगता हे में टूट जाऊंगा तुम किसी दूसरे पथ्थर से मूर्ति बनालो। तब उस मूर्तिकार उस पहले वाले पत्थर पर दया  आती हे और वो पहले वाले पत्थर को साइड में रखकर दूसरा पत्थर उठा लेता हे। और उस पत्थर पर जोर जोर से हथोड़े से चोट मारने लगता हे मगर दूसरे पत्थर से कोइ भी आवाज़ नहीं आती हे और कुछ ही दिनों के बाद मूर्ति संपूर्ण तैयार हो जाती हे। Inspirational Story In Hindi

    दस दिन के बाद गांव के लोग मूर्ति लेने के लिए मूर्तिकार के घर पर आते हे और बोलते हे की क्या आपने मूर्ति तैयार कर दी तब मूर्तिकार करता हे की हा हा मैने वो मूर्ति दो दिन पहले ही बना दी हे। में तो आपका ही इंतज़ार कर रहा था। तो गांव के लोग कहते हे की हमें अब मूर्ति को लेकर चलना चाहिए तभी एक इन्सान बोलता हे की मूर्ति के आगे एक और भी तो पत्थर रखना पड़ेगा ताकि लोग उस पर नारियल फोड़ सके। तब वो इन्सान इधर उधर पत्थर ढूंढता हे तभी उसको वो पहला वाला पत्थर दिखाइ देता हे और वो उस पत्थर को उठा लेता हे और बोलता हे की ये सही और मजबूत पत्थर हे इस पर लोग नारियल फोड़ेंगे तो आसानी से फुट जायेगा। अब गांव वाले मूर्ति और दूसरे पत्थर दोनों को लेकर मंदिर की तरफ़ चले जाते हे। रास्ते में वो पत्थर जोर जोर से चिल्लाने लगता हे की ये मुर्ख इंसानों तुम मुझे कहा ले जा रहे हो मुझे तो कठिन परिस्थितियों से बहुत ही डर लगता हे में उनका सामना नहीं कर पाउंगा और वो पुरे रास्ते में वो पहला वाला पत्थर जोर जोर से चिल्लाता रहा। आखरी गांव के लोग मंदिर पहुंच जाते हे और मूर्ति की स्थापना कर देते हे और पहले वाले पत्थर को मूर्ति के आगे रख देते हे।

        मूर्ति वाले पत्थर की लोग पूजा करने लगते हे उनको दूध से स्थान कराते हे और चंदन का लेप लगाते हे। तब वो मूर्ति वाला दूसरा पत्थर बहुत ख़ुश हो जाता हे। ये सब देखते हुए पहला वाला पत्थर दूसरे वाले पत्थर से बोलता हे की क्या बात हे भाई तुम्हारी लोग पूजा करते हे तुम पर फूल की बारिश करते हे तुम्हारी जिंदगी तो बहुत बढिया हे। उस वक्त एक व्यक्ति उस पहले वाले पत्थर पर जोर से नारियल फोड़ता हे तब वो पहला पत्थर जोर से चिल्लाता हे की ये मुर्ख इन्सान तुम ये क्या कर रहे हो क्यों मुझे मार रहे हो हे भगवान मुझे बचाओ ये मुर्ख इन्सान मेरी जान निकाल देंगे। अरे मुझे कोइ बचाओ। ये सब देखते हुए दूसरा मूर्ति बना हुआ पत्थर जोर जोर से हँसने लगता हे और वो पहले वाले पत्थर से बोलता हे की दोस्त अगर तुमने उस दिन पहला प्रहार सह लिया होता तो तुम आज मेरी जग़ह पर होते और लोग तुम्हारी भी पूजा , स्थान और फूलो की बारिश कर रहे होते। मगर तुम उस दिन डर गए और तुमने आसान रास्ता चुना और तुम्हे आज कठनाइयों का सामना करना पड़ रहा हे। यानिकि हम किसी भी समस्या से डर के आसान रास्ता चुनते हे उस वक्त तो हमें बहुत सुकून और आराम मिलता हे। लेकिन हमारी आगे की राह हमारे लिए बहुत कठिन हो जाती हे मेरे दोस्त। तब उस पहले वाले पत्थर को अपनी भूल का अहसास होता हे। और वो मूर्ति वाले पत्थर से बोलता हे की मुझसे ग़लती हो गइ में समझ चूका हु की जो लोग अपनी कठिन परिस्थितियों से नहीं गभराते और उन परिस्थितियों का सामना करते हे लोग उनको ही सन्मान और पूजा करते हे आप ने उस हथोड़े की चोट को सह कर अपनी कठिन परिस्थितियों का सामना किया इस लिए लोग आज आपकी पूजा अर्चना करते हे। मुझे मेरी गलती का अहसास हो गया हे हे भगवान मुझे तुम अपनी शरण में लेलो। अब में किसी भी कठिन परिस्थितियों से नहीं गभराउँगा और उनका सामना करूँगा। तभी मूर्ति में से आवाज आती हे की जो इन्सान सही रास्ते पर चलता हे महेनत करता हे और अपनी कठिन परिस्थितियों का सामना करता हे में हमेंशा उनके साथ रहता हु। उसी वक्त एक इंसान आता हे और पहले वाले पत्थर पर नारियल फोड़ता हे तब वो पत्थर अपनी आंखे बंध करके भगवान का नाम लेता हे तो नारियल फुट जाता हे और वो पत्थर देखता हे की नारियल तो फुट गया और उनको कुछ भी दर्द नहीं हुआ। तभी वो पत्थर भगवान का आभार मानता हे और बोलता हे की ये भगवन अब में कठिन परिस्थितियों से नहीं डरूँगा बस आप हमेंशा मेरे साथ रहेंना। अब उस पत्थर को नारियल का पानी भी पिने को मिलता था और भगवान को भोग चढ़ाने के बाद लोग मिठाई को उस पहले वाले पत्थर पर रखते थे। जिसे उस पत्थर मिठाई भी खाने को मिलती हे। तब मूर्ति वाला पत्थर बोलता हे की आज तुमने मुश्किल का सामना किया तो उसका फल भी तुमको मिलाने लगा।

      तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये सिख मिलती हे की कठिन वक्त हर किसी की जिन्दगी में आता हे वो आज नहीं तो कल लेकिन आता जरूर हे। लेकिन हमें उस कठिन वक्त का सामना करेंगे तो हमारा कल बहुत ही अच्छा होगा। हम अक्शर संघर्ष से डरते हे और पीछे हटते हे लेकिन संघर्ष तो हे जो हमें और भी मज़बूत बनाता हे इसलिए जिन्दगी में कभी भी कोइ कठिन समस्या आये तो पीछे हट ना करे बल्कि उस समस्या का हसकर सामना करे। 

अगर ये कहानी आपको पसंद हे तो आप इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी सेर करे।

 

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