सोने का सिक्का – Life Inspirational Hindi Story

           तो दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम एक ऐसी जीवन प्रेरित कहानी के बारे में बात करने वाले हे जिसे पढ़कर आप भी अपनी जिंदगी में अच्छे कर्म करके अपनी जिन्दगी को सुगंधमय बनायेंगे। क्योकि कूच लोग अपने ख़राब कर्मो की वजह से सबकुच खो देते हे वो अपनी जिन्दगी कूच हासिल नहीं कर सकते हे इसलिए हमें हमारी जिन्दगी को सुगंधमय बनाने के लिए हमें अच्छे कर्म करना चाहिए। तो चलो इस कहानी को हम शरू करते हे। 

सोने का सिक्का – Life Inspirational Hindi Story

   रतनपुर नामक एक गांव था। जिसमें एक धनवान और बुद्धिमान व्यक्ति रहता था। जो गांव में सबसे धनवान व्यक्ति था। उनके तीन बेटे थे जो अपने पिता के काम में मदद करते थे। वो धनवान व्यक्ति अपना हर काम सोच समझकर और समय पर करता था। उनके काम के चर्चे आसपास के गामो में ही होते थे। Life Inspirational Hindi Story

         कूच सालो बाद की बात हे की वो धनवान व्यक्ति वृद्ध हो गया और उनके पास पहले जैसी काम करने की शक्ति अब नहीं रही तो उसको अपने धंधे को ऐसे ही चलाए रखने के लिए उसने अपने बेटों की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। और अपने तीनो बेटो को उसने अपने पास बुलाया और कहा की में तुम्हे मेरा ये सारा कारोबार देने वाला हु। मगर तुम्हे मेरा एक काम करना हे और जो उस काम में सफ़ल हो गया उनको में ये सारा कारोबार दे दूंगा। ऐसा सुनकर तीनो बेटे बहुत खुश हो गए। उसके पिताजी ने बताया की में तुम तीनों को दो सोने के सिक्के दूंगा। उन दोनों सिक्को से तुम्हे अपना कमरा पुरे का पूरा भर देनाहे और जो अपना पूरा कमरा भर देगा में उसको मेरा पूरा कारोबार उसको दे दूंगा। मगर जो सफ़ल होगा उसको ही में ये दूंगा। तब तीनो बेटे सोचने पड़ जाते हे और तीनों को कहे मुलाबिक दो सिक्के दिया जाते हे अपना कमरा भर ने के लिए। 

             दूसरे दिन वो धनवान व्यक्ति पहले बेटे के कमरे में जाता हे और वो कमरे के अंदर देखता हे की कमरा कूड़ा से भरा हुआ होता हे मगर तब भी कमरा पूरा भरा हुआ नहीं होता। तब वो धनवान व्यक्ति अपने पहले बेटे से पूछता हे की तुम इस कमरे को पूरा भर क्यू न पाए। तो उसका पहला बेटा अपने पिता से कहता हे के पिताजी आपने जो दो सोने के सिक्के दिए थे उनसे इतना ही कूड़ा आया और में अपने कमरे को इतना ही भर पाया। तो उसके पिताजी बोले चलो ठीक हे और अब वो धनवान व्यक्ति अपने दूसरे बेटे के कमरे में जाता हे और वहा देखता की दूसरे बेटे का कमरा तो बिलकुल खाली ही हे तब वो अपने दूसरे बेटे से पूछते हे की क्या तुम्हे मेरा कारोबार नहीं चाहिए क्या मेने तुमको अपना कमरा पूरा भरने के लिए कहा था और तुम्हारा कमरा तो बिलकुल खाली हे तो उसका बेटा बोलता हे की पिताजी आपने दो सोने के सिक्के ही मुझे दिए थे इसलिए मेने सोचा की दो सिक्के से तो कूच नहीं होगा तो में जुआं खेलने जाऊंगा और दो सिक्के के चार होंगे और चार सिक्के के आठ सोने के सिक्के होंगे और में इस लालच में पड़ गया की मेरे पास जो दो सिक्के थे वो भी में हार गया तब उसके पिताजी बोलते हे की ठीक हे और वो तीसरे बेटे के कमरे में जाते हे और वहां वो देखते हे तो तीसरे बेटे का कमरा भी खाली होता हे लेकिन वो धनवान व्यक्ति उस कमरे में दस बार फूल देखता हे। और वो अपने बेटे से पूछता हे की तुमने अपना कमरा क्यों भरा नहीं हे तब उसका तीसरा बेटा अपने पिताजी से कहना हे की पिताजी ये कमरा भरा हुआ तो हे ये कमरा फूलों सुगंध से भरा हुआ तो हे क्या आपको इस फूलो की सुगंध नहीं आती। तब उसके पिताजी अपने तीसरे बेटे की चालाकी और अपने दिए गए दो सोने के सिक्के का सही इस्तमाल करने की वज़ह से उनको अपना सारा कारोबार दे देते हे। 

     तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये सीखना चाहिए की जो इस कहानी में जो खाली कमरा हे वो हे हमारी जिन्दगी और जो पिताजी हे वो हे ऊपरवाला हम सब उनके बेटे तो हे। और जो सोने का सिक्का हे वो हे हमारे कर्म। इसलिए हम सब को कर्म करने का मौका दिया जाता हे मगर कूच लोग अपने उस सोने के सिक्के रूपी कर्म से अपनी जिन्दगी में कूड़ा भर लेते हे यानिकि अपने कर्मो से अपनी ज़िन्दगी में कूड़ा भर लेते हे और अपनी ज़िन्दगी को किसी भी लायक़ नहीं छोड़ते। ओर जो दूसरे लोग होते हे वो अपने कर्मो से लालच के पीछे भागके जो अपने पास होता हे उसको भी हो खो देते हे सबकुच गवा देते हे और तिरसे लोग होते हे जो अपने कर्मो से ऐसा काम कर लेते हे की उनकी जिन्दगी सुगंध से भर जाती हे जहा वो जाते हे वहां वो अपनी पहचान छोट आते हे। इसलिए आप अपने कर्म अच्छे करे तो उसका परिणाम भी अच्छा ही होगा और आप कैसे बनाना चाहते हे मुझे कोमेन्ट में जरूर बताइये। 

तो दोस्तों अगर आपको ये कहानी पसंद हे तो आपन इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी सेर करे। 

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