पुराना सिक्का – Life Inspirational Stories In Hindi

        तो दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम बात करने वाले हे एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी के बारे में जिनको पढ़कर आप भी अपने और दुसरो के बारे में सोच समझकर ही निर्णय लेंगे। क्योकि हमें सच जानने के बाद ही हम कोइ निर्णय ले सकते हे क्योकि जल्दबाजी में लिया हुआ निर्णय से हमें बाद में पछताना ही पड़ता हे। या फिर उनका परिणाम ख़राब ही होता हे। तो चलो दोस्तों इस कहानी को हम शरू करते हे। Life Inspirational Success Stories In Hindi

Life Inspirations success story

 पुराना सिक्का – एक प्रेरणादायक कहानी

       दोस्तों ये कहानी हे एक अयान नामक लडके की जिनको पुरानी चीज़ो को संभालकर रखना बहुत ही पसंद था। अगर अयान को कोइ भी पुरानी वस्तु दिखे तो वो उसको तुरंत ही पैसे से ख़रीदकर अपने पास रख लेता था। अयान को एक दिन एक 2000 साल का पुराना सिक्का मिलता हे तो वो उसको खरीद लेता हे और अपने अलमारी में रख देता हे।

          एक दिन की बात हे की अयान को एक पार्टी में जाने के लिए आमंत्रण मिलता हे। जहा उस शहेर के सबसे प्रतिष्टित लोग आने वाले थे। तब अयान सोचने लगता हे की क्यों न में ये मेरा 2000 साल पुराना सिक्का उस पार्टी में ले जाऊ और सबको ये पुराना सिक्का दिखाऊंगा। ऐसा सोचकर अयान ने अपनी अलमारी से वो सिक्का निकाला और अपनी ज़ेब में रख दिया और पार्टी के लिए चल पड़ा।

          पार्टी में पहुँच जाने के कूच समय बाद अयान ने अपनी ज़ेब से वो पुराना सिक्का निकला और सबसे बोला की ये सबसे पुराना इजिप्त का सिक्का हे। दुनिया में सिर्फ ऐसे दो ही सिक्के हे। ये एक मेरे पास हे और दूसरा किसी अन्य इन्सान के पास हे। इस सिक्के को मैने 20000 रुपये से ख़रीदा हे। ये सिक्का इतना पुराना हे इसलिए मैने सोचा की शायद आप लोग ये सिक्का देखकर ख़ुश होंगे इसलिए में इस सिक्के को अपने साथ ले आया। उस पार्टी में करीब 200 के आसपास लोग थे सिक्का एक हाथ से दूसरे हाथ में चला जाता लोग उस सिक्के को देखते थे। तब अनेक लोगों ने उसे घेर लिया और आपस में ऐसी बात होने लगी की ये सिक्का 20000 में ख़रीदा गया हे ये कितना पुराना होंगा और कौन सी ख़ूबी होगी और किस महाराजा के वक्त का ये सिक्का होगा। ऐसी बातें होने लगी। आधा घंटे के बाद अयान के ज़िक्र किया की सिक्का कहा हे। तब सिक्का किसी के पास भी नहीं था हर किसी से पूछा गया की सिक्का कहा हे मगर सबने कहा की मैने देखा तो था मगर मैने किसी और को दिया था। वो सिक्का उन 200 इन्सानों के बिच खो गया। और वापस अयान को मिलना बहुत मुश्किल हो गया। पार्टी का सारा काम रुक गया था और सिक्के को ढूढ़ने का काम शरू हो गया। तब अंत में ये निर्णय ले गया की सब लोगों की ज़ेब की तलाशी ले जाये तो सब तैयार हो गए की हमारी ज़ेब की तलाशी ले जाये क्योकि हमनें तो सिक्का नहीं लिया हे। सभी लोगो की तलाशी ले गइ मगर अंत में एक इन्सान ने तलाशी से इनकार कर दिया और वो बोला की में चोर नहीं हु मैने कोइ सिक्का नहीं लिया हे ये में आपको बता देता हु। में यहाँ पार्टी में सम्मिलित होने के लिए आया हु ना की अपनी जेबों की तलाशी देने के लिए नहीं आया हु। और मैने ऐसा कहा भी नहीं था की मुझे आप सिक्का दिखाओ। इसलिए आप मेरी ज़ेब में हाथ डालने की कोशिश भी ना करे। ये सब सुनकर वहां मौजूद लोग सोचने लगते हे। अगर आप भी उस पार्टी में मौजूद होते तो आप क्या सोचते ? वहां मौजूद लोग ये सोचने लगते हे की जरूर इस इन्सान ने ही सिक्का चुराया हे क्योकि अगर इस इन्सान ने सिक्का नहीं चुराया हे तो ये इन्सान इतनी जिद्द किस लिए करता हे। तब सारे लोगो ने तय किया की उस इन्सान की जबरदस्ती से तलाशी ले जाये। तब उस इन्सान ने अपनी ज़ेब से पिस्तौल निकाली और कहा की मुझे माफ़ करे लेकिन जबरदस्ती का परिणाम भयंकर भी हो सकता हे। अब सिक्का मिलना और भी मुश्किल हो गया। तब कोइ रास्ता न मिलने पर पोलिश को कॉल करके खबर की गइ। और मोल के सारे दरवाज़े बंध किये गए क्योकि कोइ भी इन्सान बहार न जा पाए। और सबको ये कहा गया की जो जहाँ हे वहां खड़ा रहे। पोलिश आने ही वाली थी तब एक नौकर ने टेबल पर से बर्तन उठाया और वो हैरान हो गया क्योकि वो सिक्का उस बर्तन के निचे ही था। वो सिक्का मिल जाने के बाद उस सारे लोगो ने उस तलाशी न लेने वाले सज्जन इन्सान से कहा की तुम कैसे इन्सान हो जब तुमने सिक्का नहीं लिया था तो तुम्हे अपने तलाशी न देने और पिस्तौल निकालने की क्या जरूरत थी। क्या आपको पता हे की उस इन्सान ने ऐसा क्यू किया होगा। तब उस सज्जन इन्सान ने अपनी ज़ेब में हाथ डाला और दूसरा सिक्का निकाला और उसने सब से कहा की दूसरे सिक्का का मालिक में हु जो आप सब लोग चर्चा कर रहे थे। में भी अपने घर से ये सोचकर आया था की में अपना ये सिक्का पार्टी में सबको दिखाऊंगा मगर उस इन्सान ने पहले सिक्का दिखा दिया इसलिए मैने सोचा की अब दिखाने का कोइ मतलब नहीं हे इसलिए मैने अपना सिक्का अपनी ज़ेब में ही रहने दिया। लेकिन पांच मिनिट पहले कौन मेरा यक़ीन करता की में ही इस सिक्के का मालिक हु। लेकिन पांच मिनिट पहले में चोर था यानिकि कौन मेरा ये यक़ीन करता की में ही इस सिक्के का मालिक हु। क्या आप में से कोइ भी यकीन कर सकता था मेरा की ये सिक्का मेरा ही हे। लेकिन नहीं हम सब ये शक कर लेते हे की ये इन्सान चोर ही हे। और अगर मेरी ज़ेब से सिक्का मिल जाता तो ये बात पक्की हो जाती की में ही चोर हु। आप सभी में से कोइ भी इन्सान ये मानने के लिए राजी नहीं होता की ये सिक्का मेरा ही हे। 

    तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये ही सीखना चाहिए की हम लोग अपने बारे में निर्णय कभी भी नहीं लेते की में क्या हु और क्यू हु। मगर दूसरे के सबंध या उनके बारे में निर्णय लेने के लिए हम एक क्षण भी नहीं खोते। अगर में आपको या किसी और इन्सान आपको ये कहे की वो इंसान बहुत ही अच्छा हे तो आप तो आप उस इन्सान के कहने लगेंगे की नहीं वो इन्सान अच्छा नहीं हे। आप उसमें भी शक ही करेंगे। और अगर आपको में ये कहूँगा की वो इन्सान चोर हे या ख़राब हे तो आपके मन में कोइ भी शक नहीं होंगा। क्योकि की अगर हम किसी की बुराई करे तो हम कभी शक नहीं करते। मगर किसी की तारीफ़ या अच्छाई बताये तो हम तुरंत शक करने लगते हे।

     इसलिए दोस्तों कूद को जानना ही सबसे कठिन बात हे। और जो आदमी समझदार हे वो कभी भी किसी दूसरे इन्सान के बाबत में कभी निर्णय नहीं देता। इसलिए हमें भी सोच समझकर अपने और दूसरे के बाबत में निर्णय लेना चाहिए।

   तो दोस्तों अगर आपको ये प्रेरणादायक कहानी पसंद हे तो आप अपने दोस्तों के साथ इस कहानी को सेर करे।

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